Shree Aahore Tirth

श्री आहोर तीर्थ

 

aahor 3

मुलनायक भगवान

श्री शांतिनाथ भगवान, पद्मासनस्थ, (श्वे. मंदिर)|


 

तीर्थ स्थल :

                                सुखड़ी नदी के किनारे बसे आहोर शहर के मुख्य बाजार से कुछ दूर|


प्राचीनता :

                                इस तीर्थ का इतिहास लगभग सातसौ वर्ष के पूर्व का माना जाता है| इससे यह पता चलता है की यह शहर वि.सं. १३६५ के पूर्व बस चुका था|

                               यह आहोर शहर मारवाड़ के एक महशुर समृद्ध ठिकाने में माना जाता था| यहाँ का राजकीय ठिकाना मारवाड़ के एक प्रतिष्टित ठिकाने में मारवाड़ राज्य के प्रथम कोटि के रियासतों में था| इसको प्रथम श्रेणी का दीवानी-फोजदारी हक़, डंका निशान व् सोना निवेश का मान प्राप्त था| इस नगर के उत्थान व् समृधि में जैन श्रावकों का भी हमेशा बड़ा हाथ रहा| यहाँ के समृद्धशाली श्रावकों ने कई मंदिरों का भी निर्माण अवश्य करवाया ही होगा| इस मंदिर का निर्माण वि.सं. १४४४ में हुवा माना जाता है, परन्तु संभवत: उस समय जिणोरद्वार होकर पुन: प्रतिष्ठा हुई हो| अंतिम जिणोरद्वार वि.सं. १९९७ में हुआ|


परिचय :

                                चमत्कारिक घटनाओं के साथ निर्मित श्री गौडी पार्श्वनाथ भगवान का बावन जिनालय मंदिर अपनी विशालता एवं चमत्कारिक घटनाओं के लिये विख्यात है यह यहाँ की विशेषता है| कहा जाता है की यहाँ श्री गौडी पार्शवनाथ भगवान के मंदिर का निर्माण होकर श्री पार्श्वप्रभु श्री अलौकिक प्राचीन प्रतिमा की प्रतिष्ठा वि.सं. १९३६ माघ शुक्ल दशमी को कलिकाल कल्पतरु आचार्य श्रीमद् विजय राजेंद्रसूरीश्वर्जी म.सा. के कर कमलों से संपन्न हुई थी| उसके लगभग एक माह पश्चात चैत्र कृष्णा एकम को रात्री में चौथे प्रहर की चौथी घड़ी में आकाश वाणी हुई है की “श्री गौडी पार्श्वनाथ” तुष्टमान हुवे है|

aahor2

श्री गौडीजी पार्श्वनाथजी मंदिर का दृश्य |

                               मंदिर बहुत ही विशाल भव्य व् चमत्कारी है| कहा जाता है की श्री गौडी पार्श्वप्रभु की प्रतिमा श्री कुमारपाल राजा के समय में श्री हेमचन्द्रचार्य द्वारा प्रतिष्टित उन्ही तीन प्रतिमाओं में से है, जो अत्यन्त प्रभाविक और चमत्कारिक सिद्ध हुई थी| कहा जाता है की पूर्व में यह प्रतिमा चन्द्रावती नगरी में थी| अभी भी चमत्कारिक घटनाए घटती रहती है|

aahor1

श्री गौडीजी पार्श्वनाथजी भगवान |

                               प्रतिवर्ष जेठ सुदी को श्री शांतिनाथ भगवान के मंदिर में व फाल्गुन वदी ५ को श्री गौडी पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में ध्वजा चढ़ती है तब भव्य मेले का आयोजन होता है|

                               श्री गौडी पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर विशालता के साथ कलात्मक भी है| हर जगह विभिन्न शैली की कला नजर आती है| इस मंदिर में तीन भमती व् डबल शिखर है जो बहुत कम जगह देखने मिलते है|