Shree Hastgiri Tirth

Shree Hastgiri Tirth

 

 

श्री हस्तगिरी तीर्थ

मंदिर का दृश्य |


2h

मुलनायक भगवान

श्री आदिनाथ भगवान, श्वेत वर्ण, पद्मासनस्थ, (श्वे. मंदिर) |


 

प्राचीनता :

                         यह श्री आदेश्वर भगवान के समय का तीर्थ व श्री शत्रुंजय पर्वत का एक शिखर माना जाता है| आदिनाथ प्रभु का यहाँ पर अनेकों बार पदापर्ण हुआ| कहा जाता है की आदेश्वर भगवान के ज्येष्ठ पुत्र भरत चक्रवर्ती ने इस तीर्थ की स्थापना की थी| उस वक़्त भव्य मंदिर का अवश्य निर्माण हुवा ही होगा| अनेको बार जिणोरद्वार भी हुआ होगा| वर्तमान में पाहड़ की एक टेकरी पर एक प्राचीन देहरी है, जिसमें प्रभु की चरण पादुका प्रतिष्टित है| चरण-पादुकाए अतीव प्राचीन है, जिनपर कोई लेख नहीं है|

इसी पहाड़ पर एक विशाल मंदिर, विशाल गच्छाधिपति श्रीमद् विजय रामचन्द्रसूरीश्वर्जी की प्रेरणा से निर्मित व प्रतिष्टित है जिसका कार्य कई वर्षो से चल रहा था| संभवत: इसका निर्माण तीर्थ के जिणोरद्वार स्वरुप ही है| अतीव कलात्मक व् भव्य निर्मित हुआ है, जहाँ सभी तरह की सुविधा भी उपलब्ध है|

श्री शत्रुंजय गिरिराज श्री १२ कोष की प्रदक्षिणा में यह तीर्थ आता है|


परिचय :

                     देवाधिदेव श्री आदिनाथ प्रभु का नवानुबार पदापर्ण होकर पावन बने श्री शत्रुंजय गिरिराज का यह भी एक मुख्य शिखर रहने व प्रभु के ज्येष्ठ पुत्र श्री भरत चक्रवर्ती द्वारा इस तीर्थ का स्वप्ना होने के कारण यहाँ की मुख्य विशेषता है| कहा जाता है की श्री आदेश्वर प्रभु के ज्येष्ठ पुत्र भरतचक्रवर्ती भी यही से मोक्ष सिधारे है| श्री भरत चक्रवर्ती के पुत्र श्री हस्तिसेनमुनिजी भी असंख्य मुनिगनो के साथ यही से मोक्ष सिधारे है, ऐसी मान्यता है|यह भी कहा जाता है की भारत चक्रवर्ती का हाथी भी अनशन का यही स्वर्ग सिधार था| इन्ही कारणों से इस पहाड़ी का नाम हस्तगिरी पड़ा |

इनके अतिरिक्त तलेटी में दो मंदिर है|

इस पाहड पर से एक तरफ शत्रुंजय गिरिराज पर मंदिरों के समूहों व दूसरी और कदम्बगिरी पर्वत का दृश्य दिव्य नगरी का मन्द मधुर पवन चित्त को प्रफुल्लित करता है| यहाँ के पवित्र वातावरण से आत्मा को अपूर्व शान्ति मिलती है|