Shree Pavapuri Tirth Jeev Mitra Dham Sirohi

श्री पावापूरी तीर्थ – जीव मैत्री धाम (सिरोही)

 

 

Shri Pavapuri Jain Tirth-Sirohi

मंदिर का दृश्य|


 

pavapuri sirohi

मुलनायक भगवान

श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान |


 

परिचय :

राजस्थान के सिरोही जिले में बसा हुआ पावन पवित्रधाम श्री पावापुरी तीर्थ जीव मैत्रीधाम, के. पी. संघवी ग्रुप द्वारा विकसित किया गया है। इस तीर्थ धाम में जैन तीर्थ (मंदिर संकुल) और जीव रक्षा केंद (एनिमल वेलफेयर सेंटर) भी बने हुए हैं। इस तीर्थ का नामकरण वहाँ के पावाडा कृषि  कुऐ के नाम से किया गया है।

श्री कुमारपाल भाई वी. शाह ने के. पी. संघवी ग्रूप के स्थापक स्व. संघवी हजारीमलजी पुनमचंदज (बाफना) और संघवी बाबुलालजी पुनमचंदजी (बाफना) को पावापुरी में तीर्थधाम बनवाने की प्रेरणा दी। इस तीर्थधाम का निर्माण और विकासकार्य ३० मई १९९८ शनिवार, ज्येष्ठ शुक्ल १५ वि स २०५४ के शुभ दिन को शुरु किया गया।

प्रारभं में १०० मवेशियों के लिये गौशाला बनवाने का विचार किया गया था। किंतु आज प्रभुकृपा से यहाँ ५०० बीघा से ज्यादा जमीन पर इस प्रतिष्ठान का विस्तार हुआ है। ७१,००,००० चौरस फिट फैले जीव रक्षा केंन्द्र (एनिमल वैलफेयर सेंटर) में आज ६१०० मवेशियाँ आश्रित हैं। साथ ही मंदिर संकुल का विस्तार ३१,००,००० चौरस फीट है।

४०० शिल्पकारों की ढ़ाई साल की रोजाना कड़ी मेहनत का फल बुधवार ७ फरवरी २००१(माघ शुक्ल १४, वि. स. २०५७) को प्राण- प्रतिष्ठा पुजा के रुप में प्राप्त हुआ। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में सम्मलित होने आए भक्तगण मंदिर के निर्माण कार्य को देख गदगद हो उठे।

सिरोही, भारत के उत्तर- पश्चिमी राज्य राजस्थान के पवित्र यात्रा स्थलों में एक है , जिसके इर्द गिर्द १४ जैन मंदिर है। सदियों से इन देव मंदिरों ने अनगिनत भक्तों को प्रेम, शांति और आनंद का संदेश प्रदान किया है। ऐसी अनगिनत पवित्र परंपराओं को जीवित रखते हुए श्री पावापुरी तीर्थ जीव मैत्रीधाम भक्तजनों और वर्तमान युग की नई पीढ़ी के लिए आंतरिक सुख-शांति प्राप्त करने का अनुठा दैविक स्थान बन चुका है।

श्री पावापुरी तीर्थ जीव मैत्रीधाम जैन मंदिर शिल्पविधान व सांस्कृतिक प्रतीक बन चुका है।कला व शिल्प का संमिश्रण साधे हुए पवित्रता और मूल्यबोध करवाता यह क्षेत्र मन, शरीर व आत्मा को शांति प्रदान करता है। इसकी एक झलक शरीर, मन और आत्मा को तृप्त कर देती है।

ध्यानस्थ योगी जैसी अरावली पर्वतमाला के चिंतन, प्रेरक, शांत, सुंदर पर्यावरण में बसा हुआ श्री पावापुरी तीर्थ जीव मैत्रीधाम बड़ा ही लुभावना लगता है। यहाँ जो मन की प्रसन्नता,आंतरिक सुख व आत्मशांति मिलती है, उसे शब्दों में बया नहीं किया जा सकता सिर्फ महसुस किया जा सकता है|

जलमंदिर :

चौमुखा जल मंदिर प्रतिषठा आचार्य श्री हेमचंद्रससूरिशवरजी एवं ६ आचर्य भगवंतो, ५० साधु एवं १५० साधवीजी  भगवंतो की निश्रा में १ मई २००९ को सम्पन्न  हुई|

मंदिर संकुल के दुसरे अहाते में कुल देवता और देविओं के मंदिर बनाये गए है जिन में श्री वीर मणिभदजी, श्री नाकोड़ा भैरवजी, माँ पद्मावती, कुल देवी माँ सचिया ( औसियाँ ) और मॉ सरस्वती का मंदिर है|

सचिया माताजी -ओसवालकीकुलदेवी :

प.पू .श्री . रतनप्रभा सूरिजी के उपदेशों और सद्गुणों का पालन करते हुए ओसियाँ के राजा और क्षत्रियोंने जैन धर्म धारण किया और माँ दुर्गा के चरणों में पशुबलि चढाना बंद कर दिया किन्तु वे माताजी की पुजा अर्चना जरुर करते रहे। तब से इन माताजी को सचिया माता के नाम से अपनी कुलदेवी के रुप में स्थापित कर उनकी पुजा करते है।

मंदिर प्रतिष्ठान में कई गुंबज प्रकार के छोटे मंदिर बने हैं जो विविध देवी देवताओं को समर्पित हैं। इन की शोभा दर्शनीय है। इन मंदिरों के गुंबज सुवर्णमडित कलशयुक्त हैं। ये गुलाबी मंदिर और उनके सुनहरे कलश जैसे आध्यात्मिक स्वर्ग स्थान का अहसास दिलाते हैं। मंदिर प्रतिष्ठान और गौशाला परिसर का दूर से दर्शन करने पर पूरा स्थान पिंकसिटी समान नजर आता है। सोने पे जैसे सुहागा, उद्यान और जलाशय – दोनों से इस स्थान का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्तव कई बढ़ जाता है|

इस तीर्थ की पानी की आवश्यकता की पूर्ती हेतू चेक डेम बनवाया गया है। जिस में बारिश का पानी संग्रहित होता है और आवश्यकता नुसार पुजा एवं पक्षाल में इस्तमाल किया जाता है।

इस तीर्थ की प्रत्येक व्यवस्था का आयोजन और डिजाईन यहाँ आनेवाले सभी भक्तगणों की सुविधा और आराम को मध्ये नजर रखते हुए किया गया है ताकी वे यहाँ की मानसिक शांति और मधुर स्मृतियाँ ले कर वापस लौटें|